
Virasat Pita Ki
विरासत पिता की’ एक संवेदनशील काव्य संग्रह है, जो पिता और संतान के बीच प्रेम, संस्कार, स्मृतियों और जीवन-मूल्यों के गहरे रिश्ते को अभिव्यक्त करता है। इस संग्रह की कविताओं में पिता के संघर्ष, त्याग, स्नेह, मार्गदर्शन और उनके द्वारा दी गई अमूल्य विरासत की भावपूर्ण झलक मिलती है। लेखक ओमप्रकाश चौरे ‘भृगु’ ने सरल और सहज भाषा में उन भावनाओं को शब्द दिए हैं, जिन्हें अक्सर व्यक्त करना कठिन होता है। रचनाएँ पाठक को अपने बचपन, परिवार और पिता की यादों से जोड़ते हुए भावुक कर देती हैं। यह काव्य-संग्रह पारिवारिक संबंधों, भारतीय संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं को समझने वाले पाठकों के लिए एक मार्मिक और स्मरणीय कृति है।.
Product Details
- Format: Paperback
- Book Size:5.5 x 8.5
- Total Pages:120 pages
- Language:Hindi
- ISBN:978-9364311441
- Paper Type:Perfect
- Publication Date:August 27 ,2026
Product Description
विरासत पिता की’ एक संवेदनशील काव्य संग्रह है, जो पिता और संतान के बीच प्रेम, संस्कार, स्मृतियों और जीवन-मूल्यों के गहरे रिश्ते को अभिव्यक्त करता है। इस संग्रह की कविताओं में पिता के संघर्ष, त्याग, स्नेह, मार्गदर्शन और उनके द्वारा दी गई अमूल्य विरासत की भावपूर्ण झलक मिलती है। लेखक ओमप्रकाश चौरे ‘भृगु’ ने सरल और सहज भाषा में उन भावनाओं को शब्द दिए हैं, जिन्हें अक्सर व्यक्त करना कठिन होता है। रचनाएँ पाठक को अपने बचपन, परिवार और पिता की यादों से जोड़ते हुए भावुक कर देती हैं। यह काव्य-संग्रह पारिवारिक संबंधों, भारतीय संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं को समझने वाले पाठकों के लिए एक मार्मिक और स्मरणीय कृति है।.






