
Manav Re Danav Manav Re Danav
“मानव रे, दानव” एक विचारोत्तेजक कृति है, जो मानवता और दानवता के बीच चल रहे आंतरिक संघर्ष को उजागर करती है। यह पुस्तक समाज की बदलती मानसिकता, स्वार्थ, शक्ति, भय और नैतिक पतन पर गहरी दृष्टि डालती है। लेखक सर्वेंद्र एन द्विवेदी ने सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में यह दिखाने का प्रयास किया है कि इंसान परिस्थितियों और लालच के कारण कैसे अपने भीतर के दानव को जन्म देता है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दर्पण है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि वास्तविक मानव कौन है और दानव कौन।.
Product Details
- Format: Paperback
- Book Size:5.5 x 8.5
- Total Pages:114 pages
- Language:Hindi
- ISBN:978-9364313698
- Paper Type:Perfect
- Publication Date:May 10 ,2026
Product Description
“मानव रे, दानव” एक विचारोत्तेजक कृति है, जो मानवता और दानवता के बीच चल रहे आंतरिक संघर्ष को उजागर करती है। यह पुस्तक समाज की बदलती मानसिकता, स्वार्थ, शक्ति, भय और नैतिक पतन पर गहरी दृष्टि डालती है। लेखक सर्वेंद्र एन द्विवेदी ने सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में यह दिखाने का प्रयास किया है कि इंसान परिस्थितियों और लालच के कारण कैसे अपने भीतर के दानव को जन्म देता है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दर्पण है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि वास्तविक मानव कौन है और दानव कौन।.






