
Kolahal
मैं अपने हितैषी और मेरे पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आशीष सà¥à¤µà¤°à¥‚प हाथ फेरने वालों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ तथा मेरे अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• बनकर मà¥à¤à¥‡ आज संघरà¥à¤· करने लायक बनाया उनको धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ जà¥à¤žà¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करता हूà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥‹.à¤à¤¨.आर. साव सहायक पà¥à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• ने परख, गबन, गोदान, आवारा मसीहा, निराला, अजà¥à¤žà¥‡à¤¯ और मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¬à¥‹à¤§ के अंधेरे में (वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की खोज) कावà¥à¤¯-आदि साहितà¥à¤¯ की महानॠकृतियों के माधà¥à¤¯à¤® से अपने वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¨ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿-पल à¤à¤• नवीन विचार-धारा और जीवन के लकà¥à¤·à¥à¤¯ को पाने का मारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ किया।
विà¤à¤¾à¤—ाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· डॉ. à¤à¤¸. जे. कà¥à¤ªà¤Ÿà¤•र ने अशोक के फूल, विकलांग शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ का दौर, हाशिये पर नोटà¥à¤¸, à¤à¤• साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• की डायरी, लछमा आदि निबंध संगà¥à¤°à¤¹ का अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ कारà¥à¤¯ बी.à¤. à¤à¤¾à¤— तीन में किया और हमेशा यह कहकर आतà¥à¤®-विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ बढ़ाया कि बी.à¤.à¤à¤¾à¤— तीन का परिणाम ही आपके à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करेगी। अतः उनका यह सबक धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में खकर ही मैने अपने अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ रूपी बाण से दितीय शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ रूपी लकà¥à¤·à¥à¤¯ को साधने में सफल हà¥à¤†à¥¤
डॉ. à¤à¤¸. आर. बंजारे जिनकी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ और आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ से ही मैंने "हिनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯" को अपने मà¥à¤–à¥à¤¯ विषय के रूप में चà¥à¤¨à¤¾à¥¤
पà¥à¤°à¥‹. आर. के कà¥à¤²à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤° ने यह सीख दिया कि हनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯ के विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सदैव ही जागरूक रहना चाहिà¤, अंधेर-नगरी अनà¥à¤§à¥‹à¤‚ का हाथी पà¥à¤°à¤¹à¤¸à¤¨ à¤à¤µà¤‚ नाटक के माधà¥à¤¯à¤® से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ परिवेश में साहितà¥à¤¯ के महतà¥à¤µ के बारे में बताया।
पà¥à¤°à¥‹. थवाईत (वाणिजà¥à¤¯-विà¤à¤¾à¤—) इनकी यह उदà¥à¤˜à¥‹à¤·à¤£à¤¾ के विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कलातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ की कमी नहीं है, जरूरत है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहचानने की, ने मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया और मन ही मन उस कलातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ को सà¥à¤µà¤¯à¤‚ में ढूंढता रहा हूà¤à¥¤
रà¥à¤ªà¥‡à¤¶ नागे ने जो कि साहितà¥à¤¯ का विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ न होते हà¥à¤ à¤à¥€ साहितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ है उसने साहितà¥à¤¯ संबंधी लेख लिखने में सरà¥à¤µà¤¦à¤¾ ही मेरा मनोबल बढ़ाया है, इनके सहयोग के सहारे ही मà¥à¤à¤®à¥‡à¤‚ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के अंधेरे से लड़ने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ आई है। अनà¥à¤¤ में मैं इन महान गà¥à¤”ं जिनके मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से ही जो साहितà¥à¤¯ सृजन "कोलाहल†रचना संगà¥à¤°à¤¹ के नाम से परिणित किया हूठइनमें सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥€ डॉ. à¤à¤¸.जे. कà¥à¤ªà¤Ÿà¤•र (विà¤à¤¾à¤—ाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हिनà¥à¤¦à¥€-विà¤à¤¾à¤—), पà¥à¤°à¥‹. à¤à¤¨.आर. साव, पà¥à¤°à¥‹. आर.के. कà¥à¤²à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤°, डॉ. à¤à¤¸.आर. बंजारे, शà¥à¤°à¥€ पी.के. शà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¤à¤µ (मà¥à¤–à¥à¤¯ गà¥à¤°à¤‚थपाल), शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ ललता शरà¥à¤®à¤¾ (सहायक गà¥à¤°à¤‚थ पाल) à¤à¤µà¤‚ à¤à¥ƒà¤¤à¥à¤¯ गोवरà¥à¤§à¤¨ (à¤à¥ˆà¤¯à¥à¤¯à¤¾) तथा विशेष रूप से à¤à¤¾à¤¨à¥à¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¤¦à¥‡à¤µ शासकीय सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤•ोतà¥à¤¤à¤° महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आà¤à¤¾à¤°-वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हà¥à¤ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¥‡à¤¯ गà¥à¤°à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को नमन करता हूà¤à¥¤
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Product Details
- Format: Paperback, Ebook
- Book Size:5.5 x 8.5
- Total Pages:94 pages
- Language:Hindi
- ISBN:
- Publication Date:October 7 ,2020
Product Description
मैं अपने हितैषी और मेरे पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आशीष सà¥à¤µà¤°à¥‚प हाथ फेरने वालों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ तथा मेरे अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• बनकर मà¥à¤à¥‡ आज संघरà¥à¤· करने लायक बनाया उनको धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ जà¥à¤žà¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करता हूà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥‹.à¤à¤¨.आर. साव सहायक पà¥à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• ने परख, गबन, गोदान, आवारा मसीहा, निराला, अजà¥à¤žà¥‡à¤¯ और मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¬à¥‹à¤§ के अंधेरे में (वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की खोज) कावà¥à¤¯-आदि साहितà¥à¤¯ की महानॠकृतियों के माधà¥à¤¯à¤® से अपने वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¨ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿-पल à¤à¤• नवीन विचार-धारा और जीवन के लकà¥à¤·à¥à¤¯ को पाने का मारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ किया।
विà¤à¤¾à¤—ाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· डॉ. à¤à¤¸. जे. कà¥à¤ªà¤Ÿà¤•र ने अशोक के फूल, विकलांग शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ का दौर, हाशिये पर नोटà¥à¤¸, à¤à¤• साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• की डायरी, लछमा आदि निबंध संगà¥à¤°à¤¹ का अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ कारà¥à¤¯ बी.à¤. à¤à¤¾à¤— तीन में किया और हमेशा यह कहकर आतà¥à¤®-विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ बढ़ाया कि बी.à¤.à¤à¤¾à¤— तीन का परिणाम ही आपके à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करेगी। अतः उनका यह सबक धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में खकर ही मैने अपने अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ रूपी बाण से दितीय शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ रूपी लकà¥à¤·à¥à¤¯ को साधने में सफल हà¥à¤†à¥¤
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पà¥à¤°à¥‹. आर. के कà¥à¤²à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤° ने यह सीख दिया कि हनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯ के विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सदैव ही जागरूक रहना चाहिà¤, अंधेर-नगरी अनà¥à¤§à¥‹à¤‚ का हाथी पà¥à¤°à¤¹à¤¸à¤¨ à¤à¤µà¤‚ नाटक के माधà¥à¤¯à¤® से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ परिवेश में साहितà¥à¤¯ के महतà¥à¤µ के बारे में बताया।
पà¥à¤°à¥‹. थवाईत (वाणिजà¥à¤¯-विà¤à¤¾à¤—) इनकी यह उदà¥à¤˜à¥‹à¤·à¤£à¤¾ के विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कलातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ की कमी नहीं है, जरूरत है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहचानने की, ने मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया और मन ही मन उस कलातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ को सà¥à¤µà¤¯à¤‚ में ढूंढता रहा हूà¤à¥¤
रà¥à¤ªà¥‡à¤¶ नागे ने जो कि साहितà¥à¤¯ का विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ न होते हà¥à¤ à¤à¥€ साहितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ है उसने साहितà¥à¤¯ संबंधी लेख लिखने में सरà¥à¤µà¤¦à¤¾ ही मेरा मनोबल बढ़ाया है, इनके सहयोग के सहारे ही मà¥à¤à¤®à¥‡à¤‚ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के अंधेरे से लड़ने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ आई है। अनà¥à¤¤ में मैं इन महान गà¥à¤”ं जिनके मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से ही जो साहितà¥à¤¯ सृजन "कोलाहल†रचना संगà¥à¤°à¤¹ के नाम से परिणित किया हूठइनमें सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥€ डॉ. à¤à¤¸.जे. कà¥à¤ªà¤Ÿà¤•र (विà¤à¤¾à¤—ाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हिनà¥à¤¦à¥€-विà¤à¤¾à¤—), पà¥à¤°à¥‹. à¤à¤¨.आर. साव, पà¥à¤°à¥‹. आर.के. कà¥à¤²à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤°, डॉ. à¤à¤¸.आर. बंजारे, शà¥à¤°à¥€ पी.के. शà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¤à¤µ (मà¥à¤–à¥à¤¯ गà¥à¤°à¤‚थपाल), शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ ललता शरà¥à¤®à¤¾ (सहायक गà¥à¤°à¤‚थ पाल) à¤à¤µà¤‚ à¤à¥ƒà¤¤à¥à¤¯ गोवरà¥à¤§à¤¨ (à¤à¥ˆà¤¯à¥à¤¯à¤¾) तथा विशेष रूप से à¤à¤¾à¤¨à¥à¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¤¦à¥‡à¤µ शासकीय सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤•ोतà¥à¤¤à¤° महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आà¤à¤¾à¤°-वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हà¥à¤ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¥‡à¤¯ गà¥à¤°à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को नमन करता हूà¤à¥¤
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