Gazals
Khaab Mere Bhatakte Rahe
160
Product Details
- Format
- Paperback, Ebook
- Book Size
- 5 x 8
- Total Pages
- 120 pages
- Language
- Hindi
- ISBN
- 978-93-88256-57-5
- Publication Date
- January 1 ,1970
About this book
यूं देखने में देखिये बेहद ज़हीन हैं
खुदगर्ज़ मगर हैं बहुत ज़ाहिल कमींन हैं
पढ़ लिख गए तो और भी ऐय्यार हो गए
ये बात और है कि ये अब भी कुलीन हैं
अपने तमाम ऐब नहीं दिख रहे इन्हें
पर दूसरों के वास्ते ये दूरबीन हैं
ये टूटकर भी आज तक ज़िंदा बने हुए
सारे हमारे ख्वाब बहुत ही हसींन हैं
जो हमको मुददतों से दगा दे रहे सुगम
अब भी उन्हीं के वास्ते अपने यकीन हैं
खुदगर्ज़ मगर हैं बहुत ज़ाहिल कमींन हैं
पढ़ लिख गए तो और भी ऐय्यार हो गए
ये बात और है कि ये अब भी कुलीन हैं
अपने तमाम ऐब नहीं दिख रहे इन्हें
पर दूसरों के वास्ते ये दूरबीन हैं
ये टूटकर भी आज तक ज़िंदा बने हुए
सारे हमारे ख्वाब बहुत ही हसींन हैं
जो हमको मुददतों से दगा दे रहे सुगम
अब भी उन्हीं के वास्ते अपने यकीन हैं
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