Jeevan Sandhya
Fiction

Jeevan Sandhya

By Mukund Trivedi

120

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Product Details

Format
Paperback, Ebook
Book Size
5.5 x 8.5
Total Pages
109 pages
Language
Hindi
ISBN
978-93-90229-14-7
Publication Date
September 2 ,2020

About this book

उस दिन मतगणना विभाग के मुख्य प्रमुख अधिकारी देवाशीष सरकार अपनी निजी केबिन में उलझन भरी नज़रों से अपनी मेज पर रखे आवेदन पत्र के साथ दूसरे मेडिकल पेपरों को देखते रहे! कभी सामने एक ग़रीब, लाचार से नौजवान को गंदे, फटे कपड़ों में घूरते हुए बोले, ‘‘तुम्हारा नाम क्या है?’’ नौजवान ‘‘सर अजय जैन!’’ सरकार ने पूछा, ‘‘समीर राणे तुम्हारा क्या लगता है?’’ अजय, ‘‘सर वो मेरे मामा हैं।’’ सरकार ने हैरानी से पूछा, ‘‘तुम जैन और वो राणे...? वो तो महाराष्ट्रीयन है।’’ अजय, ‘‘सर... मेरी माँ ने जैन घराने में शादी की थी।’’ एक क्षण मौन रहने के बाद सरकार अपना माथा सहलाते हुए बोले, ‘‘देखो नौजवान, तुम्हारा मामा गम्भीर बीमारी के ईलाज के लिए मद्रास चला गयाँ हम उसकी जगह तुम्हें नौकरी पर नहीं रख सकते!’’ अजय, ‘‘सर! मुझे नौकरी नहीं, कोई भी काम चाहि उनकी जगह मैं सारा काम करुँगा।’’ सरकार, ‘‘ये नहीं हो सकता! अजय, ‘‘सर मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूँ। मगर सोचिए चुनाव नजदीक है और सुना है आपका काम भी पूरा नहीं हुआ है। अब मुझे ज्मउचवतल तो आप रख सकते हैं?’’ सरकार (सोचकर), ‘‘हाँ ये तो हो सकता है, मगर पगार कम मिलेगी।’’ अजय, ‘‘सर इतनी कृपा करें, जरूरत पड़ी तो ऑफिस में झाड़ू लगाने को भी तैयार हूँ।’’ सरकार, ‘‘ओ.के.। वो बाद में देख लेंगे, कल से तुम आ जाओ। जरूरत पड़ी तो तुम्हें बाहर के काम से भी जाना पड़ सकता है।’’ अजय, ‘‘मुझे कोई ऐतराज नहीं है।’’ अजय ने खुश होकर उन्हें धन्यवाद दिया और वहाँ से चल पड़ा।

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